भीम आर्मी ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन: नियमों को ताक पर रखकर प्रभारी प्राचार्य बनाने का लगाया आरोप, जांच की मांग



शहडोल। - भीम आर्मी भारत एकता मिशन, शहडोल द्वारा जिला कलेक्टर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर शिक्षा विभाग में चल रही प्रशासनिक अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया गया है। संगठन ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जयसिंहनगर में पदस्थ उच्च माध्यमिक शिक्षक (इतिहास) श्री राजीव तिवारी की पदस्थापना और उन्हें प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने की प्रक्रिया पर कड़े सवाल उठाए हैं।

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साठगांठ और नियमों के उल्लंघन का आरोप

सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, भीम आर्मी का आरोप है कि मूल रूप से शास.उ.मा.वि. जैतपुर में पदस्थ श्री राजीव तिवारी ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय शहडोल के लिपिकों से कथित साठगांठ कर, तत्कालीन कलेक्टर के माध्यम से स्वैच्छिक व्यवस्था के तहत अपनी पदस्थापना शास. मॉडल उ.मा.वि. (सीएम राइज) जयसिंहनगर विकासखंड में करा ली थी। संगठन का कहना है कि यह पदस्थापना नियमों को ताक पर रखकर की गई थी, क्योंकि उक्त कर्मचारी का आदिम जाति कल्याण विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन वर्ष 2018 में हुआ था, जिसके बाद उनकी नवीन पदस्थापना बिना किसी स्पष्ट नीति या आधार के कर दी गई।

योग्यता पर उठाए सवाल

ज्ञापन में सबसे गंभीर मुद्दा शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यता को लेकर उठाया गया है। भीम आर्मी के जिला संयोजक राजेश कुशवाहा ने बताया कि - "श्री राजीव तिवारी के पास बी.एड. (B.Ed.) जैसी अनिवार्य व्यावसायिक योग्यता नहीं है। इसके बावजूद उन्हें विकासखंड के दो-दो विशिष्ट विद्यालयों का प्रभारी प्राचार्य बना दिया गया। जब विकासखंड में पहले से ही कई वरिष्ठ व्याख्याता, प्राचार्य और वरिष्ठ उच्च माध्यमिक शिक्षक मौजूद हैं, तो बिना आवश्यक योग्यता वाले कनिष्ठ शिक्षक को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देना सीधे तौर पर नियमों का मखौल उड़ाना है।"

मूल पदस्थापना पर वापस भेजने और जांच की मांग
भीम आर्मी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री राजीव तिवारी की शैक्षणिक व व्यावसायिक योग्यताओं की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए। नियमों के विरुद्ध दी गई प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी से उन्हें तुरंत मुक्त कर, उनके मूल पदस्थापना स्थल (शास.उ.मा.वि. जैतपुर) वापस भेजा जाए।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रशासनिक विसंगति पर जल्द ही उचित वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।