भ्रष्टाचार के 'ग्रेवल' में दबा भुगतान: 6 साल से ₹55,000 की बकाया मजदूरी के लिए भटक रहा पीड़ित; CM हेल्पलाइन बंद करवाकर भी मुकरे अफसर!

 दिनेश चौधरी की रिपोर्ट 

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में ग्राम पंचायत चंगेरा की प्रशासनिक कार्यशैली और जनसुनवाई व्यवस्था की पोल खोलता एक गंभीर मामला सामने आया है। वर्ष 2019-20 में कराए गए ग्रेवल रोड निर्माण कार्य का ₹55,000 का भुगतान पाने के लिए पीड़ित राकेश चौधरी बीते कई सालों से जनपद पंचायत से लेकर कलेक्ट्रेट के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम छाता (नवाटोला) निवासी राकेश चौधरी के अनुसार, वर्ष 2019-20 में ग्राम पंचायत चंगेरा के सैहानी टोला और बोबरा टोला में ग्रेवल रोड निर्माण का काम कराया गया था। इस निर्माण कार्य में ट्रैक्टर और मजदूर लगाकर काम संपन्न कराया गया, लेकिन पंचायत के ज़िम्मेदारों—सरपंच और सचिव—द्वारा पीड़ित की बकाया राशि ₹55,000 का भुगतान अब तक रोक कर रखा गया है।
CM हेल्पलाइन का झांसा देकर बंद कराई शिकायत
पीड़ित राकेश चौधरी का आरोप है कि उन्होंने बकाया राशि के भुगतान के लिए CM हेल्पलाइन (शिकायत क्रमांक 16048409 एवं 22132803) पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत दर्ज होते ही पंचायत अधिकारियों ने "जल्द भुगतान करने" का आश्वासन देकर शिकायत तो बंद करवा ली, लेकिन शिकायत बंद होते ही अपने वादे से मुकर गए और राशि जारी नहीं की।
जनसुनवाई और आवेदनों का अंबार, लेकिन कार्रवाई शून्य
पीड़ित बीते कई वर्षों से लगातार प्रशासनिक चौखटों पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं:
20 जून 2023: कलेक्टर महोदय के नाम शिकायती पत्र सौंपा।
3 अक्टूबर 2023: मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जनपद पंचायत बुढार को आवेदन देकर गुहार लगाई।
17 फरवरी 2026: कलेक्ट्रेट शहडोल में आयोजित 'जनसुनवाई' में उपस्थित होकर पावती (क्र. 53) हासिल की।
27 जुलाई 2026: पुनः CEO जनपद पंचायत बुढार को रिमाइंडर पत्र सौंपकर अपने हक का पैसा मांगा।
उठते तीखे सवाल:
गरीब मजदूर और ट्रैक्टर मालिक के हक का पैसा 6 साल से दबाकर बैठने वाले पंचायत अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या CM हेल्पलाइन की शिकायतों को केवल कागजी कोरम पूरा करने और झांसा देकर बंद करवाने का खेल चल रहा है?
जनसुनवाई में लगातार आवेदन देने के बाद भी जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी इस पर कड़ा रुख कब अपनाएंगे?
पीड़ित राकेश चौधरी ने प्रशासन से जल्द से जल्द उनकी बकाया राशि ₹55,000 का भुगतान कराने और दोषी पंचायत प्रतिनिधियों व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।