​डॉ. अंबेडकर की विचारधारा और पूर्ण संविधान लागू होने पर ही होगा लोककल्याणकारी राज्य: कांग्रेस-भाजपा की विचारधारा असफल

​लाल बहादुर सिंह नेटी (विंध्य प्रभारी, भारत आदिवासी पार्टी, मध्य प्रदेश)
​देश की आजादी के 78 साल और संविधान लागू होने के 76 साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन आज भी भारत एक पूरी तरह से शक्तिशाली और लोककल्याणकारी राष्ट्र नहीं बन पाया है। यह एक गंभीर सवाल है। संविधान को लागू हुए साढ़े सात दशक से ज्यादा का समय हो गया, लेकिन इसके मूल उद्देश्यों को अब तक हासिल नहीं किया जा सका है।
​इस लंबे कालखंड में देश पर सबसे अधिक समय तक कांग्रेस पार्टी ने शासन किया। बीच में जनता पार्टी की सरकार भी बनी, लेकिन वह ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। कांग्रेस को बिना किसी गठबंधन के, लंबे समय तक स्वतंत्र रूप से सरकार चलाने का मौका मिला। 1998 के बाद भाजपा के नेतृत्व में अटल बिहारी वाजपेयी जी की गठबंधन सरकार बनी। फिर 2004 से 2014 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार रही। 2014 के बाद से केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार सत्ता में है। इसके अलावा, भाजपा आज भी कई राज्यों में स्वतंत्र या गठबंधन सरकारें चला रही है। कई गैर-कांग्रेसी और गैर-भाजपा सरकारें भी राज्यों में रहीं और आज भी हैं।
​लेकिन, सच यह है कि एक शक्तिशाली और लोककल्याणकारी राष्ट्र की स्थापना की दिशा में किसी भी राजनीतिक दल ने ठोस कदम नहीं उठाए। एक देश शक्तिशाली तभी बनता है जब उसकी बहुसंख्यक आबादी का सशक्तिकरण हो। जब उनके पास रोजगार, शिक्षा, व्यापार, उद्योग, भूमि, और मूलभूत सुविधाएं हों।
​वर्तमान सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आंकड़े:
​देश की आबादी लगभग 140 करोड़ है। संविधान के अनुसार, 'सवर्ण' आबादी लगभग 15% (21 करोड़) है।

​इसके मुकाबले बहुसंख्यक आबादी की स्थिति इस प्रकार है:
​OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग): आबादी 52%, शिक्षा में 12%, सरकारी नौकरियों में 7%, उद्योग में 0.8%, भूमि स्वामित्व में 4%, और राजनीति में 8% प्रतिनिधित्व।

​SC (अनुसूचित जाति): आबादी 15% (21 करोड़), शिक्षा में 6%, नौकरियों में 4%, उद्योग में 0.1%, भूमि स्वामित्व में 0.5%, और राजनीति में 15% प्रतिनिधित्व।

​ST (अनुसूचित जनजाति): आबादी 7.5% (10.5 करोड़), शिक्षा में 2%, नौकरियों में 1%, उद्योग में 0.1%, भूमि स्वामित्व में 0.5%, और राजनीति में 7.5% प्रतिनिधित्व।
​अल्पसंख्यक: आबादी 10.5% (14.7 करोड़), राजनीति में 3%, शिक्षा में 2%, नौकरियों में 1%, उद्योग में 2%, और भूमि स्वामित्व में 1% प्रतिनिधित्व।

​इन आंकड़ों से देश की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट रूप से सामने आती है। 76 सालों में किसी भी राजनीतिक दल ने संविधान के सही अनुपालन के लिए काम नहीं किया। जो व्यवस्था कांग्रेस सरकार ने बनाई, उसी व्यवस्था के अनुरूप बाद की सभी सरकारों ने शासन किया। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि देश में कमिशन खोरी, घूसखोरी, और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुँच गया। सामाजिक, आर्थिक, और शैक्षणिक असमानता ने देश की जड़ों को खोखला कर दिया है।

​डॉ. अंबेडकर का संदेश और हमारी मांग:
​बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शासन और प्रशासन में सबकी भागीदारी का संदेश दिया था। यदि भारत को एक शक्तिशाली और लोककल्याणकारी राज्य बनाना है, तो हमें एक ऐसी सरकार की आवश्यकता है जो समावेशी हो और जिसका प्रतिनिधित्व पूर्ण हो। इसका मतलब है कि देश के सर्वागीण विकास और उज्जवल भविष्य में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भागीदारी महसूस होनी चाहिए। यही सोच नीतियाँ बनाने और कानून बनाने वालों में भी होनी चाहिए।

​सच्चे लोकतंत्र की कसौटी:
​विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, मीडिया, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, कृषि, सुरक्षा तंत्र, पुलिस आदि में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व होना चाहिए। यह सब बिना व्यवस्था परिवर्तन के संभव नहीं है। देश की आजादी के बाद से चली आ रही यह "सड़ी-गली व्यवस्था" कांग्रेस और भाजपा नहीं बदल सकती, क्योंकि इन दोनों पार्टियों की विचारधारा संविधान-विरोधी रही है।