जैतपुर तहसील में भ्रष्टाचार का सनसनीखेज आरोप: तहसीलदार और बाबू ने सीमांकन के नाम पर मांगे 10 हजार रुपये, 181 शिकायत पर बनाया दबाव
शहडोल - कोमल प्रसाद कुशवाहा
शहडोल जिले की जैतपुर तहसील एक बार फिर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी के गंभीर आरोपों से घिर गई है।इस बार मामला एक गरीब किसान से जुड़ा है, जिसने अपनी जमीन के सीमांकन के लिए आवेदन किया था, लेकिन आरोप है कि तहसीलदार और तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबू ने मिलकर उससे 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग ली। जब किसान ने पैसे देने से इनकार किया और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई, तो उसे शिकायत वापस लेने के लिए दबाव और धमकियां दी जाने लगीं।
जानकारी के अनुसार, जैतपुर निवासी सुभाष बारी, पिता श्री मुन्नालाल बारी, ने ग्राम जैतपुर स्थित अपनी भूमि खसरा नंबर 182/1 के सीमांकन के लिए विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया था। प्रशासन द्वारा सीमांकन हेतु 5 मार्च 2026 की तारीख निर्धारित की गई थी। पीड़ित किसान का आरोप है कि निर्धारित तिथि पर जब वह सीमांकन कराने तहसील कार्यालय पहुंचा, तब वहां पदस्थ बाबू और तहसीलदार द्वारा उससे सीधे तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की गई।
किसान के अनुसार, उसे साफ शब्दों में कहा गया कि “यदि सीमांकन कराना है तो पैसे देने पड़ेंगे, अन्यथा काम नहीं होगा।” जब उसने रिश्वत देने से मना कर दिया, तो उसका सीमांकन रोक दिया गया और उसे लगातार कार्यालय के चक्कर कटवाए जाने लगे। आरोप है कि तहसीलदार ने भी मामले में कोई राहत देने के बजाय बाबू का समर्थन किया और किसान की समस्या को
गंभीरता से नहीं लिया।
परेशान होकर किसान ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शिकायत के बाद हालात और बिगड़ गए। किसान का आरोप है कि तहसील कार्यालय से उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि पहले शिकायत वापस लो, तभी जमीन का सीमांकन किया जाएगा।
कथित तौर पर उसे यह भी कहा गया कि शिकायत वापस नहीं लेने पर उसका काम लंबे समय तक अटका रहेगा।
यह मामला केवल रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक दुरुपयोग और आम नागरिकों के अधिकारों के हनन का गंभीर उदाहरण बनता जा रहा है। जिस मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया है, यदि उसी में शिकायत करने पर फरियादियों को प्रताड़ित किया जाए, तो यह पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
पीड़ित किसान सुभाष बारी ने अब पूरे मामले की लिखित शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसान ने मांग की है कि उसकी जमीन का सीमांकन तत्काल कराया जाए तथा रिश्वत मांगने वाले तहसीलदार और बाबू के खिलाफ कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या रुख अपनाता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल जैतपुर तहसील की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी और सरकारी व्यवस्था की साख पर भी बड़ा दाग साबित होगा।
