फुलकोना पंचायत में शिकायतों का अंबार, जांच पर जांच लेकिन कार्रवाई शून्य

भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों से घिरी पंचायत

अनूपपुर। जनपद पंचायत अनूपपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलकोना इन दिनों लगातार शिकायतों और जांचों को लेकर चर्चा में है। पंचायत में भ्रष्टाचार, अनियमित भुगतान, शासकीय राशि के दुरुपयोग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जीएसटी एवं टीडीएस कटौती में अनियमितता तथा सामग्री क्रय नियमों के उल्लंघन जैसी गंभीर शिकायतें विभिन्न स्तरों पर दर्ज कराई गईं। शिकायतों के आधार पर कई बार जांच दल गठित किए गए, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक हो सके हैं और न ही दोषियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है।
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*जनपद पंचायत ने गठित किया था तीन सदस्यीय जांच दल*
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार 24 दिसंबर 2025 को जनपद पंचायत अनूपपुर द्वारा ग्राम पंचायत फुलकोना में भ्रष्टाचार, अनियमित भुगतान एवं शासकीय राशि के दुरुपयोग की शिकायत पर तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। जांच दल में खंड पंचायत अधिकारी आदेश टोप्पो, खंड समन्वयक (एसबीएम) अंकुर सिंह तथा उपयंत्री एल. श्रीवास्तव को शामिल किया गया था। आदेश में जांच दल को सात दिवस के भीतर बिंदुवार जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
*GST-TDS और सामग्री क्रय नियमों के उल्लंघन की भी शिकायत*
इसके अतिरिक्त जिला पंचायत अनूपपुर में दर्ज एक अन्य शिकायत में ग्राम पंचायत फुलकोना द्वारा विकास कार्यों के भुगतान में जीएसटी एवं टीडीएस की कटौती नहीं किए जाने तथा मध्यप्रदेश पंचायत (सामग्री एवं माल क्रय) नियम 1999 के उल्लंघन के आरोप लगाए गए। जिला पंचायत द्वारा जनपद पंचायत अनूपपुर को उक्त शिकायत की जांच कर पांच दिवस के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए थे। शिकायत में वित्तीय नियमों के उल्लंघन से शासकीय धन की हानि एवं वित्तीय अनियमितताओं की आशंका व्यक्त की गई थी।
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*CM हेल्पलाइन में भी पहुंचा मामला*
वहीं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों से भी जांच प्रक्रिया की धीमी गति उजागर होती है। शिकायतकर्ता द्वारा ग्राम पंचायत फुलकोना के निर्माण कार्यों में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता एवं कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे। शिकायत की स्थिति में दर्ज विवरण के अनुसार पहले संबंधित अधिकारियों को जांच सौंपी गई, लेकिन निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने के कारण शिकायत अधिकारियों को बदलना पड़ा। इसके बाद भी जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं हो सका।
*बार-बार निर्देश, फिर भी लंबित जांच प्रतिवेदन*
13 मई 2026 की प्रविष्टि में सहायक यंत्री को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, किंतु प्रतिवेदन प्राप्त नहीं होने पर पुनः तीन दिवस के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए। इसके बावजूद शिकायत की स्थिति में "जांच प्रतिवेदन अपेक्षित है" दर्ज रहा। इससे यह स्पष्ट होता है कि शिकायतों के निराकरण में लगातार विलंब हो रहा है।
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*ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में बढ़ रही नाराजगी*
ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों का आरोप है कि पंचायत में लगातार शिकायतें होने, जांच दल गठित होने और उच्च अधिकारियों द्वारा निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। इससे ग्रामीणों में यह धारणा बन रही है कि शिकायतों को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समयबद्ध जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर खर्च की जाने वाली राशि की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
*अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल*
लगातार जांच आदेश जारी होने, समय-सीमा निर्धारित किए जाने और बार-बार प्रतिवेदन मांगे जाने के बावजूद कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव के विरुद्ध दर्ज शिकायतों में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

*अब कार्रवाई का इंतजार*
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन, जनपद पंचायत एवं संबंधित विभाग इन लंबित जांचों पर क्या निर्णय लेते हैं और शिकायतों में उठाए गए आरोपों की वास्तविकता जनता के सामने कब तक आ पाती है। फिलहाल ग्राम पंचायत फुलकोना में शिकायतों, जांचों और कार्रवाई के इंतजार का सिलसिला लगातार जारी है।