प्रशासनिक उदासीनता, झिरिया टोला के चौधरी मोहल्ले में घुटनों तक भरा पानी, कुंभकर्णी नींद में सोया पंचायत प्रशासन
जयसिंहनगर (शहडोल)।
एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर शहडोल जिले की जनपद पंचायत जयसिंहनगर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत झिरिया टोला से जमीनी हकीकत को बयां करती एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ के वार्ड क्रमांक 8/9, राम तिराहा के पास स्थित चौधरी मोहल्ला इस समय पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। निकासी की व्यवस्था न होने के कारण सड़कों पर घुटनों के बराबर गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे स्थानीय ग्रामीण और मोहल्लेवासी नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
पैसा आ रहा, पर काम कहाँ जा रहा?
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा मोहल्लेवासियों का आरोप है कि ग्राम पंचायत झिरिया टोला के सरपंच और सचिव पूरी तरह से कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। ग्रामीणों की समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं रह गया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा -
"पंचायत से समय-समय पर विकास कार्यों के नाम पर मोटी रकम तो निकाली जा रही है, लेकिन धरातल पर काम शून्य है। ऐसा लगता है कि जिम्मेदार सिर्फ अपनी जेबें भरने में मस्त हैं और हमारी तकलीफों को देखने वाला कोई नहीं है।" बढ़ रहा है बीमारियों का खतरा, ग्रामीण बेहाल घुटनों तक भरे इस दूषित पानी के कारण मोहल्ले के बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का घरों से निकलना दूभर हो गया है। जलजमाव की वजह से क्षेत्र में भयंकर बदबू फैल रही है और मच्छर पनप रहे हैं, जिससे मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी गंभीर महामारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। आक्रोशित जनता का कहना है कि बार-बार ध्यान आकर्षित कराने के बाद भी पंचायत प्रतिनिधियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
सरकार और उच्चाधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग
परेशान ग्रामीण जनों ने अब सूबे की सरकार और शहडोल जिला प्रशासन (कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी) से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों का पुरजोर अनुरोध है कि:
इस जलजमाव की समस्या का तत्काल निराकरण कर पानी निकासी की व्यवस्था कराई जाए।
ग्राम पंचायत झिरिया टोला में हुए कार्यों की उच्च स्तरीय जांच हो कि आखिर पंचायत का पैसा कहाँ ठिकाने लगाया जा रहा है।
जनता की समस्याओं की अनदेखी करने वाले और वित्तीय अनियमितता में लिप्त सरपंच एवं सचिव के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
यदि समय रहते प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय पंचायत प्रशासन की होगी।
