सीएम हेल्पलाइन की शिकायत जबरन बंद कराई, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण ग्राम सल्दा का मामला शिव कुमार सिंह के घर तक नही पहुंचा नल जल 


 राजेश कुमार यादव 


गोहपारू। सुशासन और जनसुनवाई के बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशासनिक अमले की पोल गोहपारू जनपद पंचायत में खुलती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी 'सीएम हेल्पलाइन' योजना, जिसे आम जनता की समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए बनाया गया था, अब स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों के दबाव का जरिया बनती जा रही है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला ग्राम पंचायत अंकुरी के ग्राम सल्दा (पहाड़िया टोला) से सामने आया है, जहां हक की आवाज उठाने वाले एक ग्रामीण की शिकायत को पंचायत कर्मियों ने जबरन बंद करा दिया
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 ग्रामीण शिव कुमार सिंह

 


दो घरों के चक्कर में अटकी नल-जल योजना

ग्राम पंचायत अंकुरी के अंतर्गत ग्राम सल्दा के पहाड़िया टोला में नल-जल योजना की जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर है। स्थानीय निवासी शिवा सिंह के घर और उसके पास के एक अन्य घर (कुल दो घर) तक आज तक नल-जल योजना की पाइपलाइन ही नहीं बिछाई गई है। ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण इस पूरे हिस्से को छोड़ दिया गया, जिसके चलते यहाँ के निवासियों को इस भीषण गर्मी में पानी के लिए भारी किल्लत और भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हक की आवाज उठाई तो मिला प्रशासनिक दबाव

पानी की गंभीर समस्या से परेशान होकर ग्रामीण शिवा सिंह ने शासन के नियमों के तहत सीएम हेल्पलाइन (181) पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी ताकि उनकी समस्या का समाधान हो सके। लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार करने के बजाय, ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक और सचिव ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए एक नया पैंतरा अपनाया। पीड़ित का आरोप है कि रोजगार सहायक और सचिव ने उन पर अनुचित दबाव बनाया और जबरन उनकी शिकायत को बंद (Force Close) करा दिया।

क्या कागजों पर 'ऑल ओके' दिखाने का है खेल ?

शिकायत जबरन बंद कराए जाने के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या ग्राम पंचायत अंकुरी में कागजों पर सब कुछ ठीक दिखाने का खेल चल रहा है? सीएम हेल्पलाइन की रैंकिंग सुधारने और अपनी खाल बचाने के लिए ग्रामीण को डरा-धमका कर या दबाव बनाकर शिकायत बंद कराना सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है। आखिर किसके शह पर रोजगार सहायक और सचिव ने यह तानाशाही दिखाई 
वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। नल-जल योजना का अधूरा काम और उसके बाद शिकायत वापस लेने का दबाव बनाना यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत है। ग्रामीणों ने अब इस मामले की शिकायत जिला कलेक्टर और जनपद सीईओ से करने का मन बनाया है ताकि लापरवाह पंचायत कर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो सके और छूटे हुए दो घरों तक तुरंत पाइपलाइन पहुंचाई जा सके

इनका कहना है 

1जब इस संबंध सचिव मुकेश तिवारी  से सम्पर्क करने की कोशिश किया लेकिन फोन नही लगा 

2 पानी की बहुत समस्या है मेरे घर तक  नल जल नही लगाया है सीएम हेल्पलाइन मे शिकायत करता हू तो जबरन बंद करा देते है 

ग्रामीण  शिव कुमार सिंह