गोहपारू बिजली विभाग का 'अदृश्य अमला', इंजीनियर से लेकर टीम तक जनता के लिए 'नॉट रीचेबल'
गोहपारू (शहडोल)। जिले के गोहपारू वितरण केंद्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मलमाथर (यादव मोहल्ला) में बिजली संकट अब एक मानवीय आपदा का रूप ले चुका है। लेकिन इस आपदा से भी बड़ी खबर यह है कि क्षेत्र की बिजली व्यवस्था संभालने वाले इंजीनियर श्रीनिवास पटेल और उनकी पूरी टीम धरातल से पूरी तरह गायब है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह केवल एक इंजीनियर की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे विभाग का सामूहिक गैर-जिम्मेदाराना रवैया है
इंजीनियर की 'अभेद्य दीवार' न फोन उठता है, न टीम पहुंचती है
ग्रामीणों ने इस मामले में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मोहल्ले के युवाओं और बुजुर्गों का कहना है कि जब बिजली गुल हुई, तो उन्होंने सबसे पहले इंजीनियर श्रीनिवास पटेल को फोन लगाया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद ग्रामीणों ने विभाग की फील्ड टीम और लाइनमैनों से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन वहां से भी 'चुप्पी' ही हाथ लगी
ऐसा प्रतीत होता है कि गोहपारू बिजली विभाग ने ग्रामीणों का फोन न उठाने का एक अघोषित नियम बना लिया है। ग्रामीण सवाल पूछ रहे हैं कि - "अगर कोई बड़ी अनहोनी हो जाए या बिजली का तार टूटकर गिर जाए, तो क्या विभाग तब भी फोन नहीं उठाएगा? क्या अधिकारियों को जनता से बात करने में शर्म आती है
क्षेत्र में 'दर्शन' को तरसे लोग सरकारी गाड़ियां गायब, जनता बेहाल
आमतौर पर ऐसी शिकायतों के बाद विभागीय टीम को मौके पर जाकर फाल्ट चेक करना चाहिए, लेकिन मलमाथर के यादव मोहल्ले में पिछले सात दिनों से विभाग की किसी गाड़ी या कर्मचारी के 'दर्शन' तक नहीं हुए हैं। ग्रामीण तपती धूप में सड़क किनारे खड़े होकर विभाग की टीम का इंतजार करते हैं, लेकिन श्रीनिवास पटेल की टीम अपने एयर कंडीशन्ड दफ्तरों से बाहर निकलने की जहमत नहीं उठा रही है।
भीषण गर्मी और पानी की 'त्राहि-त्राहि'
पारा 45 डिग्री के पार है। इस झुलसाने वाली गर्मी में बिना बिजली के घरों के भीतर रहना नरक जैसा है। बिजली न होने से नल-जल योजना और निजी मोटरें बंद पड़ी हैं। स्थिति यह है कि
बच्चे और बुजुर्गः गर्मी के कारण बीमार पड़ रहे हैं।
पानी का अकाल: पीने के पानी के लिए एक-एक किलोमीटर दूर जाना पड रहा है।
पशुधन का संकटः मवेशियों को पिलाने के लिए पानी का कोई साधन नहीं बचा है।
कलेक्टर-कमिश्नर को भेजी 'कॉल लॉग्स' की डिटेल
हैरान-परेशान ग्रामीणों ने अब हार मानकर शहडोल कलेक्टर और कमिश्नर को व्हाट्सएप पर अपनी शिकायत के साथ-साथ उन 'अनआंसर्ड कॉल्स' (Unanswered Calls) की लिस्ट भी भेजी है, जो उन्होंने इंजीनियर श्रीनिवास पटेल को की थीं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अधिकारियों की कॉल डिटेल्स निकलवाई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके कि वे जनता की सेवा कर रहे हैं या उन्हें नजरअंदाज ।
चेतावनी: अब घेरा जाएगा बिजली दफ्तर
ग्रामीणों ने अब अंतिम फैसला ले लिया है। यदि अगले 24 घंटे में बिजली बहाल नहीं हुई और इंजीनियर श्रीनिवास पटेल ने खुद आकर अपनी टीम के साथ जवाब नहीं दिया, तो ग्रामीण गोहपारू बिजली दफ्तर का घेराव करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और प्रशासन की होगी।
जब इस संबंध मे इंजिनियर श्रीनिवास पटेल के मोबाइल नम्बर 9827846865 मे दो बार फोन लगाया गया है लेकिन फोन नही उठा


